सेंट मैरी चर्च की अति सुंदर कलाकृति कर लेगी आपको मनमोहित, जानिए क्या है ऐसा खास इस चर्च में

वाराणसी को लोग सिर्फ मंदिरों की नगरी कहकर सीमित कर देते हैं, जबकि हकीकत ये है कि ये शहर सिर्फ एक धर्म या एक संस्कृति तक बंधा हुआ नहीं है। यहां की हर दीवार, हर छत, हर कलाकृति इंसानी आस्था और कारीगरी का (unfiltered) मिश्रण दिखाती है। यही वजह है कि वाराणसी की विरासत आपको हर मोड़ पर चौंकाती है—कभी घाटों पर, कभी संकरी गलियों में, और कभी ऐसे चर्चों के सामने जहां की कला मंदिरों से कम नहीं लगती।

इसी बहु-सांस्कृतिक विरासत का सबसे खूबसूरत उदाहरण है सेंट मैरी चर्च, जो वाराणसी कैंट स्टेशन से मुश्किल से 2 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। पहली नज़र में ही ये चर्च आपको सोचने पर मजबूर कर देता है कि आखिर 200 साल पहले इतने कम संसाधनों में इतनी जबरदस्त वास्तुकला कैसे तैयार की गई होगी। इसकी ऊँची दीवारें, भव्य आर्चेज़, कलात्मक दरवाजे और अंदर-बाहर की कारीगरी आपको यह मानने पर मजबूर कर देती है कि यह जगह किसी भी धर्म या समुदाय से पहले “कलाकारों” की धरोहर है।

St. Mary’s Church

St. Mary’s Church की कला क्यों है इतनी खास?

यह चर्च दिखने में शांत लगता है, लेकिन इसके आर्किटेक्चर में जितनी सोच, बारीकी और मेहनत लगी है, वो आज के दौर में भी मुश्किल है। खास बात ये है कि यहां धर्म की सीमाओं को तोड़ते हुए दीवारों पर गीता के श्लोक लिखे हुए हैं, और बाहर की दीवारों पर ईसा मसीह के संदेश उकेरे गए हैं। यह संयोजन सिर्फ सोशल मीडिया वाली ‘secular’ बात नहीं है, बल्कि असल में सर्वधर्म समभाव की जीवंत मिसाल है।

ये दोनों धर्मों की शिक्षाओं को साथ रखकर एक ऐसे वातावरण की रचना करता है जो इंसान को शांत भी करता है और सोचने पर भी मजबूर करता है। यह बात काफी दुर्लभ है, क्योंकि भारत में ज्यादातर धार्मिक स्थल सिर्फ अपने-अपने समुदाय की पहचान को दिखाते हैं। पर St. Mary’s Church का दृष्टिकोण बिल्कुल अलग है—यह लोगों को जोड़ने वाली कला और विचारधारा पर आधारित है, न कि विभाजन पर।

चर्च का अंदरूनी वातावरण—जहां वास्तुकला खुद बोलती है

अंदर प्रवेश करते ही आपको सबसे पहले इसकी वेंटिलेशन प्रणाली चौंकाती है। 200 साल पहले एयरफ्लो को इतनी बारीकी से डिजाइन करना कोई सामान्य बात नहीं थी। चर्च के लंबे, लोबदार दरवाजे गर्मियों में हवा के नैचुरल सर्कुलेशन को बनाए रखते हैं और सर्दियों में अंदर की गर्माहट को स्थिर रखते हैं।

इसी तरह अंदर की कलाकृति—संगमरमर पर उकेरे गए डिज़ाइन, रंगीन शीशों से बने विंडो पैटर्न—आज भी आंखों को वही ताजगी देते हैं जैसे पहले दिन दिया होगा। यह सब देखकर लगता है कि उस दौर के कारीगर टेक्नोलॉजी कम लेकिन हुनर ज़्यादा लेकर पैदा होते थे और सबसे खास हिस्सा है दीवारों पर लिखे श्लोक, जिनमें आध्यात्मिक गहराई तो है ही, साथ ही इतिहास का वजन भी महसूस होता है। ये चर्च सिर्फ पूजा की जगह नहीं, बल्कि एक तरह से मेडिटेशन हॉल जैसा फील देता है, जहां आप बैठकर खुद को कुछ मिनटों के लिए दुनिया से काट सकते हैं।

St. Mary’s Church का रोचक इतिहास—इंग्लिशिया गिरजाघर से लेकर आज के स्वरूप तक बात सिर्फ आकर्षक डिजाइन की नहीं है; इस चर्च का इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है। पहले इसे इंग्लिशिया गिरजाघर कहा जाता था क्योंकि ब्रिटिश आर्मी के सैनिक यहां प्रार्थना करने आते थे। उस दौर में भी धार्मिक स्थल सिर्फ पूजा के लिए नहीं, बल्कि सामूहिक एकजुटता और मानसिक शांति के लिए बनाए जाते थे।

यही कारण है कि इस चर्च के बाहरी प्रांगण में आपको उस समय की झलक भी मिल जाएगी। यहां बंगाल रेजिमेंट के ब्रिगेडियर की स्मृति भी मौजूद है, जो इस जगह के सैन्य और औपनिवेशिक इतिहास को दर्शाती है। marble inlay work और रंगीन कांच की कारीगरी की ताकत आज भी कम नहीं हुई है। 200 साल तक इतनी कारीगरी का टिके रहना यह साबित करता है कि निर्माण में कोई ‘शॉर्टकट’ नहीं लिया गया था।

St. Mary’s Church कितने साल पुराना है?

उत्तर प्रदेश टूरिज्म के रिकॉर्ड और चर्च पर खुद अंकित विवरण को देखने पर ये साफ होता है कि इस भव्य संरचना की नींव 1812 में रखी गई थी। लगभग दो साल तक लगातार निर्माण चला और 1814 में इसका ढांचा तैयार हो गया। लेकिन इसकी दीवारों पर जो साल दर्ज है, उसके अनुसार चर्च 1822 में पूरी तरह से बनकर तैयार हुआ। उदघाटन 1824 में बिशप रेगिनॉल्ड हेबर द्वारा किया गया था—ये वही व्यक्ति हैं जिन्हें ब्रिटिश चर्च इतिहास में बेहद सम्मानित माना जाता है। इतना पुराना होकर भी यह चर्च आज मजबूत और आकर्षक स्थिति में खड़ा है—जो इसके इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर की क्वालिटी का मजबूत सबूत है।

St. Mary’s Church घूमने का सबसे अच्छा समय

अगर आप बाहरी शहर से आ रहे हैं, तो बेकार टाइम पर विज़िट मत करना—तुम्हें पूरा अनुभव तभी मिलेगा जब चर्च अपनी पूरी खूबसूरती दिखाए। इसके लिए 25 दिसंबर यानी क्रिसमस से बेहतर तारीख कोई नहीं। उस दिन चर्च में मेला लगता है—लाइटिंग, सजावट, कैरोल सिंगिंग, और चारों तरफ भरा हुआ पॉज़िटिव माहौल। अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग यहां आते हैं, और किसी को भी यहां अजनबी जैसा फील नहीं होता। ये बात साफ है: क्रिसमस वाली भीड़ में St. Mary’s Church बिल्कुल जिंदा हो उठता है।

वाराणसी के और कौन-कौन से चर्च देखने लायक हैं?

St. Mary’s अकेला चर्च नहीं है, लेकिन लोकप्रियता में ये सबसे ऊपर है। इसके अलावा कुछ और चर्च हैं जो अपनी पहचान रखते हैं, जैसे—

  • सेंट पॉल्स चर्च (सिगरा)
  • रामकटोरा चर्च
  • तेलियाबाग चर्च
  • बेथेलफुल गॉस्पल चर्च
  • लाल गिरजाघर (नदेसर)
  • सेंट मेरीज महागिरजा

पर सच कहूं—अगर आपको सिर्फ एक चर्च देखना हो, तो St. Mary’s Church बिना किसी डाउट के आपकी पहली पसंद होना चाहिए।

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