वाराणसी उत्तर प्रदेश में गंगा नदी के तट पर स्थित एक लोकप्रिय शहर है जिसे काशी के रूप में भी जाना जाता है जहां इस शब्द की उत्पत्ति ‘कस’ से हुई है, जिसका अर्थ है ‘चमकना’। वाराणसी हिंदुओं के लिए एक बहुत ही पवित्र स्थल है जिसकी अपनी एक अलग दुनिया है और यहां की संस्कृति दुनिया भर में मशहूर है, साथ ही दुनियाभर के लोगों के लिए यह एक आध्यात्मिक स्थल है जहां पर लोग आकर इसके संस्कृति का हिस्सा बनते हैं।
वाराणसी वह नाम है जो अपने अंदर बहुत सारे रहस्यों, संस्कृति और इतिहास को समेटे हुए हैं। यह भारत के एक प्रचलित राज्य उत्तर प्रदेश का एक अभिन्न हिस्सा होने के साथ-साथ हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान भी है जहां दूसरे देशों से पर्यटक हर साल भारी मात्रा में यहां इसकी संस्कृति से रूबरू होने के लिए और इसे जानने के लिए आते हैं। ऐसे ही एक चर्चित पर्यटक मार्क ट्वेन कहते हैं, “बनारस इतिहास से भी पुराना है, परंपरा से भी पुराना है, किंवदंती से भी पुराना है, और इन सभी को मिलाकर भी दोगुना पुराना लगता है।”

जब पुराने शहरों की बात की जाती है तो वाराणसी भी उन नामों में शामिल है जो अपने समय से भी प्राचीन है। यहां पर तरह-तरह के धर्मों के लोग एक साथ निवास करते हैं और इसके स्मारकों की बात करें तो यहां पर बहुत सारे ऐसे स्मारक हैं जो सैकड़ों से हजारों साल पुराने हैं जहां राजा महाराजा काल के स्मारक आपको वाराणसी के प्रचलित स्थान गंगा घाट के किनारे मिल जाएंगे जो कि हिंदुओं का एक पवित्र स्थान है और साथ ही यहां 88 घाट मौजूद हैं, जहां का रहन-सहन दुनियाभर में मशहूर है।
ब्रैड पिट कहते हैं, “मैंने वाराणसी को बिल्कुल चौंका देने वाला पाया। मैंने पहले कभी ऐसा कुछ नहीं देखा। शहर मानो ऐसा लगता है कि गंगा नदी में समाया हुआ है… यह वास्तव में असाधारण है!”
यहां के प्रसिद्ध स्थलों की बात करें तो यहां सारनाथ जैसे प्रसिद्ध स्थान है जहां बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। अगर आप भी इस शहर के बारे में और जानना चाहते हैं तो आपको यहां एक बार जरूर आना चाहिए, जहां इसकी संस्कृति से आप भली-भांति रूबरू ही नहीं होंगे बल्कि इसका एक अभिन्न हिस्सा भी बनेंगे। यदि आप वाराणसी के बारे में और जानने के इच्छुक हैं, तो इस लेख को पूरा पढ़िए, जहां हमने उत्तर प्रदेश के प्राचीन इतिहास से लेकर प्राचीन संस्कृति, धर्म, रहस्यमई स्मारकों, लोकप्रिय स्थानों, प्रसिद्ध भोजन और लोकप्रिय त्योहारों के बारे में संक्षिप्त रूप में भी वर्णन किया है।
वाराणसी का संक्षिप्त इतिहास
वाराणसी के इतिहास की बात करें तो इसने अपने अंदर बहोत सारे भूले बिसरे इतिहास समेटे हुए हैं जिसके बारे में पूरी एक किताब भी लिख दी जाए तो कम है। वाराणसी के ऊपर पौराणिक कथाओं में बहुत सारी ऐसी चीजें बताई गई है जिसके अनुसार यह लगभग 3000 साल से भी ज्यादा पुराना है जिसमे बहुत सारी संस्कृतियों ने जन्म लिया है। वर्तमान में इसे हिंदुओं का धार्मिक स्थल और पवित्र शहरों के रूप में जाना जाता है मगर 12 वीं शताब्दी में इसमें इस्लामिक काल का भी इतिहास मिलता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में बताया जाता है कि वाराणसी की स्थापना हिंदुओं के महान देवता शिव के द्वारा की गई थी और गंगा नदी की भी स्थापना उन्हीं के द्वारा की गई थी। शायद इसलिए ही इस शहर को शिव की नगरी भी कहा जाता है और लोगों का शिव में आस्था भी इसी कारण से बहोत ज्यादा है।
रिचा चड्डा कहती हैं कि, “यह एक अजीब शहर है जहां आप एक ही समय में एक निवासी और एक एलियन की तरह महसूस कर सकते हैं।”
पहले के दौर में यहां पर बहुत तरह के प्रभावशाली दार्शनिक, आध्यात्मिक पुरुष, विद्वान और राजा महाराजा इत्यादि लोग रहते थे, जिसकी कहानी आज भी उन स्मारकों में देखने को मिलती है जो घाटों के किनारे मौजूद है। शायद इसी वजह से यहां से बहुत से विद्वान निकलकर दुनिया के सामने आए और यह हिंदुओं के लिए शिक्षा और अध्ययन का एक जाना पहचाना केंद्र बना। आज के समय में वाराणसी वह नाम है जिसकी संस्कृति दुनिया भर में विख्यात है और इसकी सांस्कृतिक विरासत, परंपरा लोगों में बहुत ज्यादा है और यह लोगों के लिए एक भावना के समान है।
वाराणसी की संस्कृति और रहन सहन
वाराणसी रहन-सहन और सांस्कृतिक रूप में दुनिया भर में विख्यात है, जहां का बोलचाल, रहन-सहन और खान-पान आपको अचंभित कर देगा, जो इसे बाकी शहरों से काफी अलग बनाता हैं। वाराणसी के हलचल भरे बाजार, त्योहार और भाषा इसे वह स्वरूप देता है जो दूसरे जगह देखने को नही मिलता है। यहां के घाटो की रौनक आपको मदहोश कर देगी और यह जानने पर मजबूर करेगी कि आखिर यह कैसी नगरी है जहां सभी लोगों का अपना अपना एक अलग किरदार होने के साथ-साथ तमाम शख्सियतों की अपनी एक अलग पहचान है और आप उन सभी लोगों से जुड़ा हुआ महसूस करेंगे जो वाराणसी के संस्कृति व रहन सहन का एक अभिन्न हिस्सा हैं। इस जगह की परंपरा, कलात्मक दृष्टिकोण और साहित्य की झलक आपको एक अलग अनुभव प्रदान करेगी जिसे आप वहां मौजूद होकर ही जान सकते हैं। साथ ही यहां के लोगों के बोलने का तरीका भी काफी ज्यादा प्रचलित है जिसे हम बनारसी भाषा के रूप में जानते हैं और ऐसे लोग आपको ज्यादातर गंगा किनारे घाटों पर और बनारस के गलियों में मिल जाएंगे।
रघु राय कहते हैं कि, “जो चीज मुझे हमेशा आकर्षित करती है वह यह है कि कैसे लोग हमेशा अपने समय के ताने-बाने में कदम रखते हैं। वाराणसी में प्रत्येक अनुष्ठान लगभग समृद्धि और समग्री का त्योहार है और अपनी संकरी गलियों वाले रास्ते और ऊपर की मंजिलों तक ले जाने वाली सीढि़यां लगी रहती हैं जो अपने आप में एक कहानी बयां करती हैं।”
वाराणसी हिंदुओं के लिए तीर्थ यात्रा व मोक्ष के रूप में जाना जाने वाला एक पवित्र स्थल है जहां भारत के कोने कोने से श्रद्धालु व पर्यटक यहां भारी मात्रा में आते हैं साथ ही विदेशी पर्यटको की भी मौजूदगी यहां देखने को मिलती है। इसके अलावा इस आध्यात्मिक स्थल पर बनारसी साड़ी का प्रचलन भी काफी ज्यादा है जो हिंदू औरतों का एक पारंपरिक वस्त्र है। वाराणसी के फेमस फूड की बात करें तो यहां मलाइयो, लिट्टी चोखा और कचौरी जैसे प्रचलित पकवान हैं।
वाराणसी के लोकप्रिय स्मारक
आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत से परिपूर्ण वाराणसी को प्राचीन नगरी के रूप में जाना जाता है और इस प्राचीनता में ऐसे कई स्मारक है जो सैकड़ों से हजारों साल तक पुराने हैं जिनमें बीते हुए कल की झलक देखने के साथ-साथ महसूस करने को भी मिलती है। इन स्मारकों की पुरानी चकाचौंध को महसूस करने के लिए हर साल लाखों लोग यहां आते हैं। इन्हीं में से कुछ लोकप्रिय स्मारक इस प्रकार हैं –
काशी विश्वनाथ मंदिर
लोगों की आध्यात्मिक विरासत से परिपूर्ण यह मंदिर हिंदुओं के भगवान शिव को समर्पित है जिसे वाराणसी के सबसे पवित्र मंदिरों के साथ-साथ सबसे पुराने स्मारक के रूप में भी जाना जाता है।
सारनाथ
दुनियाभर में चर्चित यह जगह बौद्ध धर्म का तीर्थ स्थल है जहां भगवान बुद्ध द्वारा पहला उपदेश दिया गया था और साथ ही यहां पर बहुत सारे पुराने स्मारक है जिनमें से कुछ प्रमुख स्मारक धमेख स्तूप और चौखंडी स्तूप हैं।
मणिकर्णिका घाट
अगर आप जिंदगी के सत्य से रूबरू होना चाहते हैं तो गंगा किनारे बसा मणिकर्णिका घाट आपके लिए बेहतर होगा, क्योंकि यहां जिंदगी से मौत तक का सफर देखने को मिलता है। हिंदू धर्म के लोग इस जगह को पवित्र स्थल के रूप में मानते हैं जहां दाह संस्कार होना उनके लिए सौभाग्य की बात होती है।
रामनगर किला
18 वीं सदी में बना राजा महाराजाओं के जमाने का यह किला भारत में काफी ज्यादा लोकप्रिय है, जहां हर साल लाखों लोग यहां इसकी सुंदरता को देखने और इसकी प्राचीनता को महसूस करने आते हैं। इसके अलावा यहां का व्यंजन और तमाम लोक कार्यक्रम मशहूर है जिनकी गूंज भारत में हर तरफ सुनाई देती है।
वाराणसी के घाट
गंगा किनारे मौजूद 88 घाट काफी ज्यादा प्राचीन है जिनकी चर्चा बीते हुए इतिहास के पन्नों में नजर आती है और साथ ही यहां की संस्कृति और रहन सहन में भी इसकी झलक साफ देखने को मिलती है।
वाराणसी के प्रसिद्ध जगह
गलियों से पहचाने जाने वाले इस शहर में ऐसे कई जगह हैं जहां भारत से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग इस शहर की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिकता को महसूस करने के साथ-साथ यहां के जगहों को एक्सप्लोर करने के लिए आते हैं।
दशाश्वमेध घाट
हिंदू धर्म के मुताबिक यह एक ऐसा स्थान है जहां पर भगवान ब्रह्मा के द्वारा दशा अश्वमेध यज्ञ किया था जिसके कारण इसका नाम दशाश्वमेध घाट पड़ा। यह गंगा किनारे बसा एक ऐसा आध्यात्मिक स्थल है जहांपर हर शाम को एक विशेष आरती देखने के लिए हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, इसमें विदेशी पर्यटक भी शामिल होते हैं। इसके अलावा अगर आप नाव के द्वारा इस घाट की सुंदरता को देखेंगे तो आपको यह दृश्य काफी मनमोहक लगेगा।
गंगा घाट
अगर सबसे लोकप्रिय स्थल की बात करें तो वाराणसी का गंगा घाट इसमें सबसे ऊपर आता है क्योंकि यहां पर 88 घाट है जहांपर हर एक घाट की अपनी एक अलग मान्यता है और साथ ही यहां ऐसे भी स्मारक है जो सैकड़ों साल से भी अधिक पुराने हैं। इसके अलावा यहां की गलियां और रहन-सहन आपको अकेलेपन की अनुभूति नहीं होने देगा, जहां जगह जगह पर ऐसे ऐसे दृश्य देखने को मिलेंगे जो आपको कहीं दूसरे जगह देखने को नही मिलेंगे।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा 1916 में स्थापित यह विश्वविद्यालय 11 किलोमीटर में फैला हुआ है जो एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालय में से एक है जहां 30000 तक छात्र रहकर यहां शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। इसके अलावा यहां विदेशों से भी छात्र पढ़ने के लिए आते हैं जहां सभी तरह की शिक्षा मुहैया की जाती है। सिर्फ यही नहीं बल्कि यहां घूमने के लिए भी बहुत सारे स्थल हैं जहां काफी सारे पर्यटक हर साल आते हैं, जिसमे नया विश्वनाथ मंदिर भी शामिल है जो सैकड़ों साल पुराना माना जाता है और साथ ही यहां भारत कला भवन स्थित है जिसमें विभिन्न प्रकार की कला और कलाकृतियों का संग्रह रखा गया है।
सारनाथ
बौद्ध धर्म का पवित्र धार्मिक स्थल जहां पर भगवान बुद्ध ने पहला उपदेश दिया था और यहीं से उनके प्रचार प्रसार का आरंभ हुआ था जो धर्म चक्र प्रवर्तन के रूप में दुनिया भर में विख्यात है, जिसके कारण पूरी दुनिया अब उनके बारे में जानती है। सारनाथ में ऐसे बहुत सारे स्तूप और स्मारक हैं जो सैकड़ों साल पुराने हैं, जिनमे से कुछ प्रमुख स्थलों में भगवान बुद्ध का मन्दिर, धामेख स्तूप, जैन मन्दिर, चीनी मन्दिर, अशोक का चतुर्मुख सिंहस्तम्भ, नवीन विहार, चौखन्डी स्तूप, मूलंगधकुटी, राजकीय संग्राहलय इत्यादि हैं।
वाराणसी के लोकप्रिय व्यंजन
वाराणसी के खान पान के बारे में अब क्या ही कहा जाए, जहां के लोग खाने के भी उतने ही मुरीद हैं जितने कि अपने संस्कृति और आध्यात्मिकता से। यहां के संस्कृति व रहन-सहन से लेकर खानपान, यह सभी चीजें दुनिया भर में मशहूर हैं, जिसका जिक्र हमें दुनिया के हर कोने में देखने को मिलता है। यहां पर हमने कुछ लोकप्रिय व्यंजनों के बारे में बताया है जो वाराणसी में सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है।
पान
पान वाराणसी की पहचान है जिसका जिक्र आपको कभी ना कभी सुनने को मिला ही होगा, जिसे वाराणसी के लोग तरह तरह के व्यंजन को खाने के बाद आखिर में पान के स्वाद को चखना पसंद करते हैं। पान को पान के एक विशेष पत्ते में चूने, सुपारी और इत्यादि कई मिश्रण के संयोजन से बनाया जाता है जिससे लपेटकर खाया जाता है और वाराणसी के लोग इसका खूब लुफ्त उठाते हैं।
मलइयो
मलइयो भी विशेष व्यंजनों में शामिल है जिसका जिक्र आपको कभी ना कभी किसी जगह सुनने को मिला ही होगा। यह व्यंजन वाराणसी की पहचान है जिसकी छटा आपको हर एक गलियों में देखने को मिलेगी। दूध से बनाया हुआ यह एक मीठा व झागदार पेय पदार्थ है जिसे एक विशेष विधि के द्वारा तैयार किया जाता है और तैयार होने के बाद इसमें कटे हुए पिस्ता व बादाम डाले जाते हैं जिसकी खुशबू आपको बनारस की गलियों में दूर से ही आ जाएगी।
लस्सी
लस्सी भी एक लोकप्रिय मीठी दही और पानी का पेय पदार्थ है जिसे लोग मिट्टी के बने पुरवे में पीना पसंद करते हैं।
ठंडाई
एक विशेष त्योहार होली व महाशिवरात्रि के पर्व पर पिया जाने वाला यह ठंडा पेय पदार्थ गुलाब जल, दूध, बादाम और साथ ही कई चीजों के मिश्रण से बनाया हुआ होता है जिसे हम ठंडाई के रूप में जानते हैं।
पूरी कचौरी
सुबह की शुरुआत होते ही पूरी कचौरी यूपी वालों का खासकर बनारसी लोगों का यह एक खास स्ट्रीट फूड है जिससे लोग स्वाद लेकर खाना पसंद करते हैं और यह आपको हर एक जगह देखने को मिल जाएगी, यहां तक की गलियों में भी। अगर हम इसकी सामग्री के बारे में बात करें तो ये मसालेदार पकी हुई सब्जियों के साथ और तली हुई पुड़ियों के साथ परोसा जाता है।
बाटी चोखा
यह भी वाराणसी के लोगों का एक प्रिय व्यंजन है जो उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्य बिहार से संबंधित है और इसके स्वाद का जादू आपको हर तरफ देखने को मिलेगा। इसे आटे को गोल करके आंग में भुना जाता है और इसे आलू, टमाटर, बैंगन के साथ-साथ इत्यादि सामग्रियों को मिलाकर बनाया जाता है जिसे यहां के लोग चोखा कहते हैं।
चाट
चाट सबसे लोकप्रिय स्ट्रीट फूड में से एक है जिसे लोग उत्तर प्रदेश में चाव से खाते हैं और निश्चित रूप से इसकी उत्पत्ति उत्तर प्रदेश में ही हुई है।
वाराणसी के प्रसिद्ध त्यौहार
जैसा कि हमने पहले भी बताया कि वाराणसी संस्कृति और अध्यात्मिक तत्वों से परिपूर्ण है जहां की हर एक हवा में इसकी एक कहानी महसूस करने को मिलती है और इसी विभिन्न प्रकार की संस्कृति व रीति-रिवाजों के चलते यहां पर ऐसे बहुत सारे त्यौहार मनाए जाते हैं जो अपनी एक अलग कहानी बयां करती है।
होली
होली को वाराणसी के अलावा भारत के बाकी जगहों पर भी मनाया जाता है पर वाराणसी की तो कुछ और ही बात है जहां पर इसे अलग तरीके से मनाया जाता है। मणिकर्णिका घाट पर जहां लोग मरे हुए लोगों का अंतिम संस्कार करने आते हैं, उनके साथ भी यहां के लोग आपको होली खेलते हुए दिखेंगे साथ ही आपको ऐसे भी साधु दिखेंगे जो आधुनिक दुनिया से कटे हुए अपना एक अलग जीवन व्यतीत कर रहे होते हैं मगर होली के त्यौहार पर वह भी एक अलग तरह का नृत्य करते हुए दिखेंगे। साथ ही उन लोगों की वेशभूषा भी बाकी लोगों से काफी अलग होगी जो इंसानी खोपड़ीओं की माला पहने हुए होते हैं।
दशहरा
यह हिंदुओं का एक पवित्र त्यौहार है जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है और साथ ही रामायण की कथा के अनुसार जिसमें रावण को एक बुराई के रूप में माना जाता है, उसे यहां के लोग जगह-जगह पर छोटे से बड़े पुतले बनाकर उसे जलाते हैं।
महा शिवरात्रि
महादेव की नगरी काशी (वाराणसी) में इस त्यौहार को काफी धूमधाम से मनाया जाता है क्योंकि यहां के लोगों की आस्था भगवान शिव में अपार है जिसकी महिमा की तेज महाशिवरात्रि के दिन वाराणसी के गलियों व गंगा घाटों पर में देखने को मिलती है।
गंगा महोत्सव
1 सप्ताह तक चलने वाला संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक महोत्सव हिंदूओ की आस्था स्वरूप गंगा नदी के सम्मान में आयोजित किया जाता है, जिसे हिंदुओं द्वारा एक पवित्र नदी के रूप में माना जाता है।
नवरात्रि
9 दिन तक मनाया जाने वाला यह त्योहार हिंदू धर्म की देवी दुर्गा को समर्पित है जिसमें 9 दिन नौ देवियों की पूजा की जाती है और वाराणसी के साथ-साथ भारत के बाकी दूसरे जगहों पर भी इसे काफी बड़े स्तर पर धूम धाम से मनाया जाता है।
बुद्ध पूर्णिमा
बौद्ध धर्म के लोगों का एक पवित्र त्यौहार जो भगवान बुद्ध के द्वारा प्राप्त ज्ञान और साथ ही उनकी जन्म व मृत्यु का जश्न मनाता है।
अगर आप भी इस शहर से रूबरू होना चाहते हैं तो आपको यहां एक बार जरूर आना चाहिए, जहां इसकी संस्कृति से आप भली-भांति रूबरू ही नहीं होंगे बल्कि इसका एक अभिन्न हिस्सा भी बनेंगे। तो इस आर्टिकल में हमने जाना वाराणसी के प्राचीन इतिहास से लेकर इसके प्राचीन संस्कृति, धर्म, रहस्यमई स्मारकों, लोकप्रिय स्थानों, प्रसिद्ध भोजन और साथ ही लोकप्रिय त्योहारों के बारे में भी। तो हम आशा करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और पर्यटन से जुड़े बाकी अनुभव को पाने के लिए हमारे इंस्टाग्राम अकाउंट को फॉलो जरूर करें, धन्यवाद।